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वक्त पराजित हो जाए, पर जीवन हरदम जीता है। मंत्र यही है जीने का भी, कहती पावन ‘गीता’ है: गिरीश पंकज

“जीत जिंदगी की होती है।”

वक्त पराजित हो जाए, पर जीवन हरदम जीता है।
मंत्र यही है जीने का भी, कहती पावन ‘गीता’ है।।

हार गए और टूट गए तो, कैसे कहलाएं इनसान ?
जिस में हिम्मत होती उसके साथ सदा होते भगवान ।
हर पल हम विश्वास भरे हों, जीवन परम पुनीता है।।
मंत्र यही है जीने का भी, कहती पावन गीता है।।

माना पग-पग पर बाधाएं, चारों तरफ निराशा है।
पर हमको जो रखती जिंदा, अमृतसम वह आशा है ।
वही रचा जीवन को बेहतर, जो अमृत-घट पीता है।।
मंत्र यही है जीने का भी, कहती पावन गीता है।।

क्षणभंगुर जीवन है लेकिन कर्म हमारी पूजा है ।
जब तक सांसें चले हमारा, काम नहीं कुछ दूजा है ।
वही हारता जिसके अंतर्मन घट ही रीता है।।
मंत्र यही है जीने का भी, कहती पावन गीता है।।

जो नर हुआ निराश, विफलता उसको घेरा करती है।
दृढ़ इच्छाशक्ति वाले से, असफलता खुद डरती है ।
जीवन हो पावन जल अपना, मानो परम प्रणीता है।।
मंत्र यही है जीने का भी, कहती पावन गीता है।।

साहित्यकार: गिरीश पंकज।

 

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