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कृषि सुधार कानूनों से कहीं भी-किसी को भी उपज बेचने की आजादी से किसान होगा सशक्त




मथुरा ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री पंडित श्रीकान्त शर्मा ने शुक्रवार को मथुरा में ब्रजवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि देशभर के किसानों के हित में लाये गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर विपक्ष भ्रम की राजनीति कर रहा है। इन कानूनों में MSP को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। न ही मंडी व्यवस्था समाप्त की जा रही है और न ही किसानों के खेतों के स्वामित्व पर कोई खतरा मंडरा रहा है।


प्रधानमंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि नये कानूनों से खेती में ज्यादा निवेश होगा। फॉर्मिंग एग्रीमेंट में सिर्फ उपज का समझौता होता है। जमीन किसान के पास रहती है, एग्रीमेंट और जमीन का कोई लेना देना ही नही है। विपक्ष ने स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को 8 साल तक दबाये रखा।

नए कानूनों के अनुसार, अगर अचानक मुनाफा बढ़ जाता है, तो उस बढ़े हुए मुनाफे में भी किसान की हिस्सेदारी सुनिश्चित की गई है। प्राकृतिक आपदा आ जाए, तो भी किसान को पूरे पैसे मिलते हैं।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार पहले ही साफ कर चुकी है MSP की व्यवस्था थी, है और रहेगी। साथ ही APMC मंडियां भी अपना काम करती रहेंगी। नये कानूनों से किसानों के पास अपनी उपज बेचने के विकल्प बढ़ गये हैं।

भूमि पर निजी कंपनियों के कब्जे को लेकर फैलाये जा रहे भ्रम पर ऊर्जा मंत्री ने कहा कि किसानों को नए कानूनों के तहत पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गयी है। किसानों की भूमि की बिक्री, पट्टा या बंधक पूरी तरह प्रतिबंधित है। विवाद के निवारण हेतु स्पष्ट समय सीमा के साथ प्रभावी विवाद समाधान तंत्र भी प्रदान किया गया है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि PM श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में किसान हित में ऐतिहासिक कदम उठाये गये हैं। उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है और MSP भी लागत का डेढ़ से दो गुना तक हुई है।

किसानों की आय दोगुनी करने के लिये संकल्पित मोदी सरकार में 2014-19 में 76.85 लाख मीट्रिक टन दाल की खरीद की गई। जबकि 2009-14 तक किसानों से मात्र 1.52 लाख मीट्रिक टन दाल की खरीद की गई थी। यानी इसमें 4,962 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया।

वर्ष 2009-14 के बीच 2 लाख करोड़ रुपये के कुल धान की खरीद हुई जो वर्ष 2014-19 में ढाई गुना बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये की हुई। सरकारी एजेंसियों द्वारा पिछले वर्ष जहां 266.19 लाख एमटी धान की खरीद की गई थी, वहीं अब तक 315.87 लाख मीट्रिक टन धान किसानों से खरीदा जा चुका है।
कुल खरीद का 64% अकेले पंजाब के किसानों से खरीद की जा चुकी है।

वर्ष 2009-14 के बीच कुल गेहूं खरीद 1.5 लाख करोड़ रुपये हुई थी जो वर्ष 2014-19 में 2 गुना बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये की हुई।

वर्ष 2009-14 की तुलना में वर्ष 2014-19 के बीच कुल दाल की खरीद में 75 गुणा की बढ़ोतरी हुई।

खरीफ विपणन सत्र 2020-21 में सरकारी एजेंसियों द्वारा अब तक 315.87 लाख मीट्रिक टन धान, 1,00,120.96 मीट्रिक टन मूंग, मूंगफली, सोयाबीन एवं उड़द, 5,089 मीट्रिक टन कोपरा और 28,16,255 कपास की गांठें खरीदी जा चुकी हैं।

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